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चीटियां एक लाइन में क्यों चलती है? छिपकली दीवार से नीचे क्यों नही गिरती

दोस्तो भगवान द्वारा बनाई गई इस सृष्टि को अगर गौर से देखा जाए तो हर चीज़ के पीछे एक विज्ञान छुपा हुआ है। क्या आपने कभी सोचा है कि चीटियां एक ही लाइन में क्यों चलती है, छिपकली दीवार से नीचे क्यों नही गिरती और उल्लू रात को ही क्यों देख पाते हैं। इस पोस्ट में आज मैं इन्ही बातों के ऊपर चर्चा करुगा। आशा करता हु की आपको हमारा ये पोस्ट जरूर पसंद आएगा।  

चींटियों की लाइन
चींटियों में कुछ ग्रंथियाँ होती हैं जिनसे फ़ैरोमोंस नामक रसायन निकलते हैं। इन्हीं के ज़रिए वो एक दूसरे के संपर्क में रहती हैं। चींटियों के दो ऐंटिना होते हैं जिनसे वो सूंघने का काम करती हैं। जब रानी चींटी भोजन की तलाश में निकलती है तो वो फ़ैरोमोंस केमिकल छोड़ती जाती है। दूसरी चीटियाँ अपने ऐंटिना से उसे सूंघती हुई  पीछे-पीछे चली रहती हैं। जब रानी चींटी एक ख़ास फ़ैरोमोन बनाना बंद कर देती है तो चीटियाँ, नई चींटी को रानी चुन लेती हैं, जो फ़ैरोमोंस छोड़ती है। फ़ैरोमोंस का प्रयोग और बहुत सी स्थितियों में होता है। जैसे अगर कोई चींटी कुचल जाए तो चेतावनी के तौर पर फ़ैरोमोन का रिसाव करती है जिससे बाक़ी चींटियाँ हमले के लिए तैयार हो जाती हैं। 

दीवार पर कैसे चलती है छिपकली
छिपकली के पैर छोटे छोटे और शरीर बेलनाकर होता है इनके पैरो की बनावट कुछ ऐसी होती है कि जब छिपकली दीवार के ऊपर चलती है तो उनके पैरो और दीवार के बीच वैक्यूम अर्थात शुन्य पैदा हो जाता है, जिस कारण उनके पैर दीवार पर चिपक जाते हैं बाहरी हवा का दबाव भी उसे दीवार पर चलने में सहायक होता हैं।

रात को कैसे देखते हैं उल्लू
उल्लू रात्रि में मानव से कई गुना अधिक देख सकता है क्योंकि उसकी आँखों में प्रतिबिम्ब वाली विशेष कोशिकाएं होती हैं जो रोशनी को अपने भीतर सोख लेती हैं। यह एक ऐसा विचित्र पक्षी है, जिसे दिन कि अपेक्षा रात में अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। उसे दिखाई तो दिन में भी देता है, लेकिन उतना स्पष्ट
नहीं।

दोस्तो आशा करता हु की हमारा ये पोस्ट आपको जरूर पसंद आएगा। इसे अपने दोस्तों और फैमिली के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।


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