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History of Adidas and Puma: क्यों अलग हुए Adidas और Puma? (What happened between Adidas and Puma)

दोस्तों Adidas और Puma आज के समय में दो बेहद ही लोकप्रिय स्पोर्ट्स ब्रांड है। दुनिया में शायद ही ऐसा कोई खेल होगा जहां इन दोनों ब्रांड के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल ना होता हो। इन दोनों ब्रांड्स की सबसे खास बात यह है कि इनके जो मालिक हैं वो दो सगे भाई, एडोल्फ डेसलेर(एडी) और रुडोल्फ डेसलेर(रूडी) है। दोस्तो एडिडास और प्यूमा अलग अलग होने से पहले दोनों भाई एक ही कंपनी में काम करते थे, जिसका नाम डेसलेर शूज फैक्ट्री था और ये कंपनी उनकी खुद की थी।


कुछ गलतफहमियों के चलते दोनों भाइयों में झगड़ा हुआ और दोनों ने अपनी अलग-अलग कंपनी खोली डाली।एडोल्फ ने अपनी कंपनी का नामकरण करते हुए अपने उपनाम एडी और अपने अंतिम नाम के पहले तीन अक्षर डास को मिलाकर इसे एडिडास के रूप में स्थापित किया और इसी तरह रुडोल्फ जानी रूडी ने भी रूडा नामक एक नई कंपनी स्थापित की , जिसमें रुडोल्फ में से रू और डास्लर में से डा लिया गया। आगे चलकर इसी कंपनी का नाम बदलकर प्यूमा रखा गया।

कैसे हुई शुरुआत

दोस्तों इन दोनों भाइयों की कहानी जर्मनी के हर्ज़ोजेनौराच शहर से शुरू होती है। इनके पिता क्रिस्टोफ डेसलेर जूते बनाने वाली किसी कंपनी में काम करते थे और माता घर मे एक लांड्री चलाती थी। पहले विश्व युद्ध के दौरान दोनों भाइयों को जर्मन आर्मी में भर्ती होना पड़ा। सेना में भर्ती होने से पहले दोनों भाई अपने पिता क्रिस्टोफ से जूते बनाने का काम सीख चुके थे।

विश्व युद्ध खत्म होने के बाद एडोल्फ जानी एडी ने अपनी मां के बंद पड़ चुके लॉन्ड्री हाउस को जूते बनाने वाली छोटी सी फैक्ट्री में तब्दील कर दिया और जूते बनाने का काम शुरू कर दिया। सन 1924 में दोनों भाइयों ने अपनी जूतों की कंपनी की स्थापना की जिसका नाम डेसलेर ब्रदर्स शूज रखा गया। दोनों भाइयों को स्पोर्ट्स बेहद पसंद थी और अपनी इसी पसंद के चलते दोनों ने सिर्फ स्पोर्ट्स शूज ही बनाने का फैसला किया।

सन 1930 में हुए ओलंपिक्स में ऐसे काफी सारे नए एथलीट थे जिन्होंने डेसलेर कंपनी के शूज पहने थे और इनमें से कुछ एथलीट्स ने जब गोल्ड मेडल जीते तो गोल्ड मेडल के साथ-साथ डेसलेर कंपनी के जूतों की भी चर्चा होने लगी। धीरे-धीरे कंपनी का नाम और रुतबा बढ़ने लगा और कई बड़े-बड़े स्पोर्ट्समैन और ट्रेनर कंपनी के बारे में जानने लगे।

सपना हुआ सच

दोस्तों सन 1936 में हुए ओलंपिक ने दोनों भाइयों की जिंदगी पूरी तरह बदल डाली। ये ओलंपिक्स जर्मनी के बर्लिन शहर में हुए थे और उस समय जेसी ओवेंस स्पोर्ट्स की दुनिया का एक बड़ा नाम हुआ करता था। ओलंपिक शुरू होने से पहले एडोल्फ ने जेसी ओवेंस को अपनी कंपनी के जूते पहनने और उनकी कंपनी का ब्रांड एंबेसडर बनने  के लिए राजी कर लिया।

ये डेसलेर शूज कंपनी के लिए किसी सपने से कम नही था। डेसलेर कंपनी के जूते पहन जेसी ओवेंस ने चार गोल्ड मैडल जीते, जिसके बाद दुनिया के प्रसिद्ध खिलाड़ियों के बीच डेसलेर जूतों की चर्चा होने लगी। इस दौरान डेसलेर जूतों की डिमांड इतनी ज्यादा बढ़ गई कि हर साल 2 लाख से भी ज्यादा जूते सेल होने लगे। 

एडिडास और प्यूमा की शुरुआत

दोस्तो दोनों भाई जब अच्छा खासा पैसा छाप रहे थे तब दोनों ने नाज़ी पार्टी में शामिल होने का फैसला लिया। रुडोल्फ पार्टी के कुछ ज्यादा ही करीब था और यह बात एडोल्फ को कुछ खास पसंद नहीं थी। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब अमेरिका ने जर्मनी को हराया तो अमेरिका ने उन सभी लोगो को इकट्ठा किया जो नाज़ी पार्टी से जुड़े हुए थे। उन लोगो की लिस्ट में इन दोनों भाइयों का भी नाम था। एडोल्फ तो ओलंपिक्स में जेसी ओवेंस को दी गयी सहायता का हवाला देकर बच निकले, लेकिन अडोल्फ को अमेरिका ने एक साल के लिए नज़रबंद कर दिया। 

नजरबंदी के दौरान रुडोल्फ को शक हुआ कि किसी नजदीकी व्यक्ति ने ही उनके बारे में अमेरिका को बताया है। उनका शक सीधा अपने भाई एडोल्फ के ऊपर गया, जिसके चलते दोनों भाइयों में झगड़ा और ज्यादा बढ़ गया। इसी झगड़े के चलते सन 1948 में दोनों भाइयों ने अपना कारोबार अलग अलग करने का फैसला लिया। अलग अलग होने के बाद एडोल्फ ने अपनी कंपनी का नाम Adidas और रुडोल्फ ने अपनी कंपनी का नाम Puma रखा।

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