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भारत को गोल्ड जितवाने वाले नीरज चोपड़ा की ज़िंदगी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

दोस्तो टोक्यो ओलंपिक्स में भारत की तरफ से अलग-अलग खेलों में हिस्सा लेने वाले सभी खिलाड़ियों का परफॉर्मेंस जबरदस्त रहा है। पिछली कुछ गेम्स में भारत जीत तो रहा था, लेकिन गोल्ड मैडल तक पहुंचने का सफर तय नही कर पा रहा था। हरियाणा के शेर नीरज चोपड़ा ने इस कांटो भरे सफर को तय करके भारत को गोल्ड मैडल की मंजिल तक पहुचाया है। आपको बता दे कि नीरज का ये पहला ओलंपिक्स था। साल 2016 में हुए Rio ओलंपिक्स में नीरज क्वालीफाई नही कर पाए थे, और बाहर हो गए थे, लेकिन इस बार नीरज ने अपनी पहली ही कोशिश में गोल्ड जीतकर भारत का सिर पूरी दुनिया मे ऊंचा कर दिया है। आगे मैं आपको नीरज चोपड़ा की।ज़िंदगी से जुड़े कुछ ऐसे मज़ेदार तथ्य बताउगा जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

घर परिवार और पढ़ाई
दोस्तो नीरज चोपड़ा का जन्म हरियाणा में पानीपत के खंडरा गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। नीरज के पिता का नाम सतीश कुमार और माता का नाम सरोज देवी है। परिवार में नीरज की दो बहनें भी है। पढ़ाई की बात करें तो नीरज ने चंडीगढ़ के दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की हैं और इसके साथ साथ वो पंजाब के जालंधर शहर में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ आर्ट्स की पढ़ाई कर रहे हैं।

कैसे हुई खेल की शुरुआत
नीरज की उम्र जब 12 साल थी तब उसका वजन लगभग 90 किलो के आसपास था, जिसके चलते स्थानीय लड़के उसे खूब चिढ़ाते थे। बेटे के बढ़ते हुए वजन से चिंतित नीरज के पिता ने उसे मतलौडा(पानीपत) में जिम जॉइन करवा दिया। जिम जाने के लिए नीरज को प्रतिदिन 24 किलोमीटर साईकल चलाना पड़ता था जो नीरज को पसंद नही था। इसके बाद नीरज के अंकल भीम चोपड़ा नीरज को पानीपत में एक जिम जॉइन करवा देते है। पानीपत के इस जिम में नीरज की बॉडी एक अच्छी शेप में आने लगती है।

नीरज के गुरु
जिम के साथ साथ नीरज पानीपत के स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के स्पोर्ट्स सेंटर में भी जाते थे। जहां पर जयवीर सिंह नामक कोच ने नीरज की भाला फेंकने की शुरुआती प्रतिभा को पहचाना। बिना किसी प्रशिक्षण के नीरज द्वारा 40 मीटर थ्रो हासिल करने की क्षमता से प्रभावित होकर, जयवीर ने उन्हें कोचिंग देना शुरू कर दिया। नीरज के परिवार को पता भी नहीं था कि उसने भाला फेंकना शुरू कर दिया है। एक दिन जब स्थानीय अखबार में उनकी अंतर-जिला टूर्नामेंट जितने की तस्वीर छपती है तो सभी हैरान रह जाते है। इसके कुछ सालों के बाद नीरज पंचकुला के ताऊ देवी लाल स्टेडियम में स्थानांतरित हो जाते हैं और 2015 में नेशनल कैम्प में आमंत्रित होने तक वहां प्रशिक्षण करते हैं। 

खिताब
आपको बता दें कि नीरज छह बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में पदक जीत चुके हैं। 2018 में उन्होंने जकार्ता एशियाई खेलों, गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई चैम्पियनशिप, दक्षिण एशियाई खेलों और जूनियर विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीते है। साल 2016 में, वह जूनियर एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक विजेता थे।

नीरज का इंडियन आर्मी से नाता
नीरज की उपलब्धियों को देखते हुए साल 2016 में भारतीय सेना ने उन्हें नायब सूबेदार के पद के साथ जूनियर कमीशंड अधिकारी नियुक्त किया था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नही देखा और भारत को एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलो में स्वर्ण पदक जितवाया। हाल ही में टोकियो ओलंपिक्स गेम्स में गोल्ड मैडल जितने पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने नीरज चोपड़ा को 6 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा की।

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