Ticker

6/recent/ticker-posts

टॉयलेट फ्लश के ऊपर दो बटन क्यों होते है?

दोस्तो वाशरूम किसी भी इमारत का सबसे अहम हिस्सा होता है और साफ-सफाई के साथ साथ वाशरूम में लगी एसेसरीज पर हमेशा से बहुत ध्यान दिया जाता है। आपके घर से लेकर शॉपिंग मॉल के वाशरूम में नए जमाने के नए अंदाज के साथ मॉर्डन फिटिंग्स की एंट्री हो चुकी है और ऐसे में आपने वहां लगे कई तरह के फ्लश (Flush) देखे और इस्तेमाल किए होंगे। दोस्तो आपने नोटिस किया होगा कि अक्सर फ्लश में एक बड़ा और एक छोटा बटन दिया गया होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? अगर नहीं तो आज हम आपको बताएंगे कि ऐसा क्यों होता है?


पानी बचाने का कॉन्सेप्ट

दरअसल मॉर्डन टॉयलेट्स में दो तरह के लीवर्स या बटन होते हैं और दोनों बटन, एक एक्जिट वॉल्व (Exit Valve) से जुड़े होते है। बड़े बटन को प्रेस करने से करीब 6 लीटर पानी निकलता है और वहीं छोटे बटन को दबाने से 3 से 4.5 लीटर तक पानी निकलता है।

दोस्तो छोटा बटन दरअसल आपके यूरिन को फ्लश करने के लिए तैयार किया गया है क्योंकि यूरिन फ्लश करने में कम पानी की जरूरत होता है और इस बटन के यूज़ से आप काफी पानी बचा सकते है। इसके साथ ही टॉयलेट में दिया गया बड़ा बटन मल को फ्लश करने के लिए यूज़ होता है। मल को फ्लश करने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत होती है, इस लिए ये बटन ज्यादा मात्रा में पानी फ्लश करता है। 

अब आइए जानते हैं कितने पानी की बचत इस तरह से हो जाती है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर एक घर पर सिंगल फ्लश (Single Flush) के बजाए ड्युल फ्लशिंग (Dual Flushing) अपनाया जाये तो पूरे साल में करीब 20 हजार लीटर पानी की बचत हो सकती है। दोस्तो भले ही इसका इंस्टालेशन नॉर्मल फ्लश से थोड़ा महंगा है, लेकिन इसकी वजह से आपके पानी के बिल में कटौती की पूरी गारंटी दी जा सकती है। वहीं ड्यूल फ्लश (Dual Flush) कॉन्सेप्ट के बारे में बात करें तो ये अमेरिकी इंडस्ट्रीयल डिजाइनर विक्टर पैपनेक (Victor Papanek) का आईडिया है। आपको बता दें कि सन 1976 में विक्टर पेपनेक ने अपनी किताब ‘Design For The Real World’ में इसका जिक्र किया था। 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ